उत्तर प्रदेश में कोरोनावायरस के अब तक 20 केस सामने आए हैं। महामारी की श्रेणी में इस बीमारी को लाते हुए मुंख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी धरना प्रदर्शनों पर प्रतिबंध लगा रखा है। बावजूद इसके लखनऊ के घंटाघर परिसर में दिल्ली के शाहीन बाग की तर्ज पर बीते 17 जनवरी से महिलाएं प्रदर्शन कर रही हैं। गुरुवार को जिला प्रशासन ने प्रदर्शनकारी महिलाओं को धरना खत्म करने के लिए समझाने की कोशिश की। लेकिन बात नहीं मानी गई। जिसके बाद पुलिस ने बल प्रयोग करते हुए टेंट को उजाड़ दिया है। इस दौरान पुलिसकर्मियों व प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का मुक्की भी हुई। जिससे तीन महिलाएं बेहोश हो गईं। फिलहाल प्रदर्शनकारी महिलाएं हटने को तैयार नहीं हैं। इलाके में माहौल तनावपूर्ण है। जिसके मद्देनजर सुरक्षा बल तैनात है।
प्रदर्शनकारी महिलाओं ने पुलिस पर अभद्रता करने का आरोप लगाया है। कहा कि, हम शांतिपूर्वक धरने पर बैठे थे। लेकिन महिला सिपाहियों ने हमारे मंच को उजाड़ दिया। महिलाओं को पीटा गया। जिससे तीन महिलाएं बेहोश हुई हैं। सीएए एक काला कानून है। महिला सुरक्ष की दुहाई देने वाली पुलिस महिला प्रदर्शनकारियों के साथ अन्याय कर रही है। बेहोश हुई महिलाओं को नजदीकी अस्पताल ले जाया गया है। प्रदर्शनकारी महिलाएं नारेबाजी कर रही हैं।
एडीसीपी विकास चंद्र त्रिपाठी का कहना है कि कई लोग अनावश्यक रूप से खड़े थे और बाइक खड़ी कर रखी थी। इसे ही हटवाया गया है। प्रदर्शन कर रही महिलाओं को नहीं हटाया जा रहा है। लाठीचार्ज या पिटाई का आरोप गलत है।