25 मार्च को नवरात्र के पहले दिन रामलला टेंट से निकलकर अस्थाई मंदिर में विराजमान होंगे। उस दिन रामलला मखमली भगवा वस्त्र में होंगे। नवरात्र होने के चलते पहल दिन रामलला को सिंघाड़े, कुट्टू के आटे की पूड़ी, सब्जी, खीर, हलवा व पंचमेवा का भोग लगेगा। उसे श्रद्धालुओं में वितरित किया जाएगा। मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास ने बताया कि, यह परंपरागत व्यवस्था है।
आचार्य सत्येंद्र दास ने बताया- श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट अगर व्यंजनों में कुछ और शामिल करना चाहे तो उसे भी जोड़ा जाएगा। 28 साल बाद भगवान राम टेंट से निकलकर अस्थाई मंदिर में विराजमान होने जा रहे हैं। ऐसे में वे क्या खाएंगे, क्या पहनेंगे, इसकी पूरी तैयारी कर ली गई है। मुख्य पुजारी कि, वैदिक पूजा अर्चना के साथ 20 मार्च से अस्थाई मंदिर की भूमि का शुद्धीकरण शुरू होगा।
तेलंगाना के 34 जिलों के नाम भेंट होगी ईंटें
हैदराबाद के मनीकुंडा के रहने वाले चल्ला श्रीनिवास समाजसेवी हैं। उन्होंने बेटे के नाम पवन कुमार फाउंडेशन संस्था की तरफ से रामलला को चांदी की 34 ईंट देने का संकल्प लिया है। तेलंगाना में 34 जिले है। हर जिले के नाम से एक ईट दी जाएगी। सोने की पांच किलो की ईंट भी प्रदान की जाएगी। चांदी की एक ईंट बनाने में करीब 1 लाख 63 हजार की लागत आती है। यह ईंटें करीब तीन माह में हैंडओवर कर दी जाएगी। बुधवार को चल्ला श्रीनिवास ने दान स्वरुप एक ईंट तीर्थ क्षेत्र ट्रस्टी राजा अयोध्या विमलेन्द्र मोहन मिश्र, अनिल मिश्र व जिलाधिकारी अनुज कुमार झा को दी, जिसे कोषागार में भगवान की सम्पत्तियों के साथ रखा गया।